2017-07-17

जाति नहि कर्मसँ पण्डित बनैत छै


जन्म मात्रसँ कियो विद्वान, पण्डित नइँ होइत अछि । कोनो निश्चित जाति, कुलमे जन्म लेलासँ मात्र संस्कृत, वेद, ज्योतिषआदि विषयके ज्ञाता हएबाक सोचके चुनौति दैत समाजमे बहुतो युवा अपनाके सिद्ध कऽ रहल अछि ।
महोत्तरी जिलाक मटिहानी गामक विरेन्द्र कापर तेहने व्यक्तित्व छथि । सिद्धान्त ज्योतिष विषयमे मटिहानीस्थित याज्ञवल्क्य लक्ष्मीनारायण विद्यापीठसँ शास्त्री आ काठमाण्डूक वाल्मिकि विद्यापीठसँ स्नातकोत्तर केनिहार कापर चर्चित ज्योतिषाचार्य छथि । नेपाल वान टेलिभिजनसँ प्रसारित ज्योतिष सम्बन्धि कार्यक्रमआदिसँ हिनक विदेशमे सेहो ख्याति कमौने छथि ।
हिन्दु धर्मक प्रचार आ प्राचीन ज्योतिष शास्त्रक प्रसारमे लागल कापर अनन्त श्री जगद्गुरु पदवीसँ सम्मानित व्यक्तित्व छथि । विश्व हिन्दु महासंघ अन्तर्राष्ट्रिय धर्म सभा आ महन्थ सभा संयुक्त रुपमे कापरके इ पदवीसँ सम्मानित कएने अछि । काशी विद्वत परिषद्, अखिल सनातन धर्म महासभासहितके संस्था एहिके समर्थक रहल अछि । नेपालमे अनन्त श्री जगद्गुरु पदवीसँ सम्मानित कापर दोसर व्यक्तित्व छथि, एहिसँ पहिने इ पदवी चतराधामक बालसन्त मोहनशरणके देल गेलछल । आदि शंकराचार्य जगद्गुरु पद्वी देबाक चलन सुरु कएने रहथि । ई शैव आ वैष्णव दुनू सम्प्रदायके विद्वानके इ पदवी देबाक चलन अछि । 

वेद, उपनिषद्आदिके रचनासेहो नेपालमे भेल सन्दर्भमे एहि पदवीसँ ओ परिवेशकेँ सम्मान भेल कापरक कहब छन्हि । संस्कृत भाषा निश्चित जाति विशेषके भाषा नइँ रहल कापरके सफलतासँ प्रमाणित होइत अछि । कापर कहैत छथि जे ई संस्कृत, वेद, ज्योतिषआदि पढ़बालेल सभ स्वतन्त्र अछि, जँ पढ़िकऽ कियो योग्य बनैत अछि त सर्वत्र ओकर सम्मान सेहो होइत अछि । 

राजपाट आ अनबुझ दोलत्ती


कालिकान्त झा तृषित
राजपाट
राष्ट्रिय जनता पार्टी विधिवत दर्ता होबऽ जा रहल छैक । मुसरी बाबू सेहो एकर एहि नामसँ बड़ प्रसन्न छथि । हुनक कहब छनि जे एहि पार्टीकँे इएह नाम विशेष रूपे सूट करैत छैक, राजपा अर्थात राजपाट दिआबऽ बला पार्टी । नहि विश्वास होअए त इतिहास देख लिऔ जे कोनो पूर्वबर्ती सरकार गठन भेल छलैक तै सब मे इ लोकनि समर्थन करैत आएल छथिन से चाहे ताहि समयमे जाही नामधारी पार्टीमे रहल छल होथि । आब इ बात दीगर छैक जे सरकार राज्यारोहण करिते हिनके लोकनि के भष्मासुर जेकाँ तह लगएबाक हेतु चहेटऽ लगलनि ।  सधुआ लोकसब निष्कर्षविहीन वार्तामे अन्दर–बाहर होइत रहलाह से क्रम एखनो निर्बाध रूपे चलिए रहल छैक ।
प्रचण्डजीक राज्यारोहणमे समर्थन कएलनि हुनक ९ महिनाक कार्यकाल बितलनि गर्भावस्थाधरि सम्झौता बार्ता सब होइत रहलै से अल्ट्रासाउण्डमे देखाइतो रहलै मुदा उपलब्धि गर्भान्हरे रहलै आब से कार्यभार अर्थात सेरोगेट मदरबला जिम्मेवारी देउवाजीके जिम्मा अएलनि । प्रथमे ग्रास मच्छिका पात भऽ गेलै । बीबीसीके कोनो कार्यक्रममे एकटा छौंड़ा सुनैछी अक्सफोर्ड विश्वविद्यालयकँे सर्टिफिकेट माँगि देलकनि बूझू जे फेर योग्यतापर प्रश्न उठा देलकनि । इ त संयोग नीक छैक जे ज्ञानेन्द्रकेँ शासन नहि छलनि नहि त पुनः नवका प्रमाणपत्र हाथ लागि जइतनि । बूझू जे सबतरहेँ सबहक रक्षा भऽ गेलनि ।
आब एमाले पार्टीबलासब वामदेव गौतमजीके अश्वमेधकेँ घोडा जेकाँ प्रधानमन्त्री पदक हेतु नाम आगाँ बढ़ा देने अछि । ओ अपनो किछु पहिनहिसँ रत्नपार्क लग वर्जित ठामसँ रोड क्रस करैत सिंहदरबार दिस टांग उठा देने छलखिन जे फोटो भाइरल भऽ गेल छल । एहि प्रसंगमे एमाले पार्टीके सेहो आब राजपाट दिआबऽ बला पार्टीके जरूरत पड़ि गेल छनि । एमालेके नेतालोकनि फेर कहाँदन बेसिए लचकि रहल छथिन आ संशोधित संस्करण अएला पर संविधान संशोधनक हेतु ओ सब अग्रणी भूमिकामे रहथिन आखिर राजपाटबला स्वार्थसँ आबद्ध बात छैक ।
ओना त एहिठामक मिडियापर विश्वास करब कठिन छैक, झूठो फूइस बातके सोरहो आना ग्यारेन्टीए दैत समाचार सम्प्रेषण करैत रहैत छैक तहन बिना आगिए धुआँ हएबपर कोना विश्वास करबै ? कहाँदन भीतरे भीतरे एमाले आ राजपाट दिआबऽ बला पार्टीमे किछु खिचडी पाकि रहल छैक से तेहने गन्ध दुर्गन्धसँ प्रदूषण बढ़बाक सम्भावना बढ़ि गेल छैक ।
बाँकी बात त सूरदासकँे घी जेकाँ गडगडाएगा तब समझेँगे ।

अनबुझ
वादी कहे बाङ, पञ्च कहे पोला, नेपाल सरकार पथलक गोबरचोते के गोला ।। समस्याक रूप मे उपस्थित मांग वा प्रसंगक समाधानक हेतु तत्सम्बन्धी इमान्दारीपूर्ण प्रयासमे वार्ता वा निर्णय हएब महत्वपूर्ण होइत छैक से बात त जग जाहिरे छैक । एहनमे घाव कहीँ आ पौ कहीँ के हिसाबसँ कहियो समाधान नहि भऽ सकैत छैक । बरू समस्या अओर जटील होइत जएबाक सम्भावना बढैत रहैत छैक, से तहिना अधिकार प्राप्तिक हेतु आन्दोलनरत मधेशी जनजाति पिछड़लवर्ग सभहक मांगके विषयमे बूझियोकऽ बूझ पचबैत सत्तापक्ष प्रदेश नम्बर २ केँ चुनाव बादमे करएबाक अयुक्तिसंगत निर्णय कोन प्रयोजनसँ कएने छैक से अनबूझ बुझौअलि (पहेली) बनि गेल छैक ।
सत्तापक्ष सहमतिएमे निर्णय कएने छी से कहैत छैक मुदा आन्दोलितपक्षक ने ओहन कोनो मांग छैक आ ने कोनो सहमति कएने छैक । अतः सत्ता पक्षक प्रपञ्च स्वतः उजागर भऽ गेल छैक यद्यपि हाथमे मिडिया छैके तकर दुरूपयोग करैत आन्दोलनके बदनाम करबाक हेतु गलत प्रचार करबा रहल छैक
सोशल मिडियामे सेहो स्वनाम धन्य अनलाइन पत्रकार सब ठकुरसुहाती समाचार सम्प्रेषण कइए रहल छथि । एम्हर इहो बात खूब चर्चा होइत रहल छैक जे चुनावमे भाग नहि लेलासँ राजपाकेँ अस्तित्व समाप्त भऽ जएतै, भारत सेहो भाग लेबाक हेतु दबाब दऽ रहल छैक, किछु नेता जे मधेशेके मुद्दासँ सर्वत्र चिन्हार भेला, पद–प्रतिष्ठा कमाइ धमाइ सब भेलनि से हुनको एखन राष्ट्रियता की अराष्ट्रीयता तेहन जोर मारने छनि जे बुद्धि विचारसब गिरगीट जेकाँ रंग बदलि रहल छनि वा रामहिलोरा जेकाँ खूब आगा पाछा अल्टी पल्टी मारि रहल छनि लोक आश्चर्य मे अछि “छी इ केहन पनिमरूआ आदमी भ गेलै ।”

जहाँतक भारतके सवाल छै, भारत सरकारक आधिकारिक धारणा आबि गेल छैक जाहि मे स्पष्ट कहल गेल अछि जे “नेपालमे समावेशी संविधानक लेल समाजक सभ तह आ तप्काकेँ साथ लेब आवश्यक अछि, समावेशी संविधानक आकांक्षाकेँ समर्थन ।” नेपाल सरकारके गद्दीपर जे कियो रहला एहि वास्तविकतासँ मुँह मोड़नेहे रहलाह, समस्याके एक दोसर दिश हस्तान्तरण करैत गेलाह, अपन अपन पार पुरबैत गेलाह, तही क्रममे आब देउवा जी जाग्रत छथि । हिनको सोच आलेटाल बला बुझाइत छैक फेउर कहीँ नओ महिनाक बाद इहो नौ दू एगारह होइथिन आ पुनः प्रचण्डजीक गद्दी रोहण हएतनि अथवा कोनो दोसर बिलराक भागसँ सीक टुटतै से प्रतिक्षाक विषय रहत । इ सब होइते रहतै आ आन्दोलनरतके रस्ता बन्द नहि कएल जएतनि । जयचन्द सबके अगहनी होइत रहतनि । 

2016-10-02

देवी मैया













रोशन जनकपुरी

देवी मैया !
दऽ सकै छी तऽ दिय जवाब
होइ छै किया
सब दिन
खाली मौगिए डाइन
आ मनसा भगता ?
देवी मैया !
अहीं सन मौगी
समेटै छै अपनामे
सिर्जनाके बून्द
आ, सिरजै छै
मनसो आ मौगियो,
देवी मैया !
दऽ सकै छी तऽ दिय जवाब
मौगिए सन अहाँ
पूजल जाइछी
आ अहीं सन मौगीकेँ
कहल जाइछै किया डाइन ?
पिआएल जाइ छै गूँह–मूत,
देल जाइ छै
वर्वर सामूहिक हत्याके दण्ड
आ बेर–बेर दइत रहैत अइछ
सलामी,
रखैत अइछ साक्षी
अहींके, मनसा ।
देवी मैया !
अहाँके याद अइछ
नचबै त तरुआइर
आ बरका–बरका मोंछबला
मुण्डमाल पहिरने अपन चित्र ।
देवी मैया !
की अहाँंके बूझल अइ
मनसा, अहाँंके ओ चित्र
रखने अइछ जो गाकऽ
मु दा जीवन बिना,
आ बन्न कऽ दे ने अइछ
एकटा को ठरीमे वा गहबरमे
बना कऽ काठ–पाथर
आ माइटक थु म्हा ।
दे वी मै या !
कि अहाँकेँ लगैया नीक
सालमे एक बेर पुजाइत
आ भइर साल
दण्ड भोगैत रहब मौगी होबऽके
बेटी–पत्नी आ मायक रुपमे ।
देवी मैया !
कहि सकैछी तऽ कहू
एकटा मौगीके रुपमे
कहियो रहि सकैत छी अहाँ ं
स्वतन्त्र ?
देवी मैया !
धूप, धुम्मन आ गुगुलक
आँंइख–कान आ नाकमे घुसियाइत
तिक्ख धूँंआँक बीच
मूड़ी झँंटैत
करताल भँंजैत
भगता सबके मन्तरसँ
मनसाएल
मर  ीआ मलेछिया
कहियाधइर ढोइत रहत
मौगी होबाक पीडा ?
मुदा, देवी मैया !
बूझल अइछ हमरा
मायक रुपमे
आ शक्तिक रुपमे
स्थापित कऽ कऽ
कऽ लेने अइछ कैद
अहाँंकेँ,
आ कऽ लेने अइछ कब्जा
अहाँंक सभ शक्ति ।
आ बूझल अइछ इहो
मौगी,
होएत नइँ जाधइर लैस
ज्ञान आ संघर्षक हथियारसँ
ने तऽ अपने स्वतन्त्र होएत
ने अहाँ ।

घिक्कारः सन्दर्भ अपने

कृष्ण भक्त श्रेष्ठ

पहिने–पहिने
आदमी बूढ़ होइत छल
भेवे कएल
हमरा बाबा–दादाके समयमे सेहो
हँ, आदमी बूढ़ भेल
आइ हमरा समयमे
यन्त्रवत्
ओ निरन्तरता पाबि रहल अछि
फरक मात्र एतबे
जे एहि बेर
हम अपनेबूढ भऽ गेलौ
जानि नेजानि किछु औचित्यहीन
आ असान्दर्भिक सेहो
एकटा अनौपचारिक फसिल
कडासँ कडा
वास्तविकतासँ विभत्स
पक्का–पक्की ई केयो अपवाद नहि अछि
जन्मेसँ
घिक्कारे मोचराएल
आइ हम अपने
दोसर घिक्कार जन्मसँ
घिक्कार ! घिक्कार !
(अनुवादः रामदमाल राकेश)

नेपालक भाषा नीति आ भारतीय स्वार्थ


रमेश रञ्जन 
भाषा मामिलामे नेपालमे भारत चकमा खाइत रहल अछि । नेपालक तराइके हिन्दी पट्टीक रुपमे देखबाक भारतीय सत्ताधारी वर्गक प्रयास निराशामे परिणत होइत रहलै । ई नेहरु आ राजा महेन्द्रक विचारधारात्मक रणनीतिक द्वन्द छलै जाहिमे नेहरु विचार दबल रहलै । नेहरु नेपालमे अप्रत्यक्ष शासन, प्रत्यक्ष भाषा, व्यापारिक एकाधिकार, भारतीय सैन्य सुरक्षामे नेपालके रखबाक प्रयत्न करैत रहल । राजा महेन्द्रक मण्डले राष्ट्रवाद नेहरुक एहिसभ सूत्रके काटिकऽ एकभाषिय नीति, शासकीय केन्द्रियता, भारत आ चीनसँ समदूरीक सिद्धान्तके तत् चतुराइसँ स्थापित कऽ देलकै जे भारत गोंगियाएल तँ मुदा बाजि नइ सकल । बदलामे किछु नदी, पहाड़ आ सामरिक महत्वक जगह नेपाल भारतके नजरानाक तौरपर दैत रहलै ।
प्रश्न ई छै जे भारत ६० वर्षधरि नेपालमे हिन्दी भाषाक लेल प्रयास आ लगानी कऽ रहल छल । भारतक कुटनीतिक सारतत्व हिन्दी भाषाक लेल छै । नेपालक भूमिपर भऽ रहल भारतीय कुटनीतिक प्रयासके देखल जाए त ई भ्रम नइ रहि जाइ छै जे भारत नेपालक समथर भूमिमे हिन्दीके लहलहाइत देखऽ चाहैए । नेपालमे हिन्दीक लेल लगानी की छै आ प्रतिफल की ओ भारतीय अधिकारीके हिसाव–किताव रखबाक आवश्यकता नइ छै । किए तँ दुनू हाथे लुटाओल जा रहल छै—हिन्दीक लेल लविंगके नामपर । प्रश्न एतऽ सीधा छै आ उत्तर सेहो सीधा । मुदा ने प्रश्न सीधा रहऽ देल जा रहल छै आ ने उत्तर । भारतके विहार, उत्तरप्रदेश सन राज्यके जनता आ नेपाल तराइक जनताक सांस्कृतिक, भाषीय, बेटी–रोटीक समवन्ध आ अन्य किछु मनगढ़न्त भावनात्मक आधार देखाकऽ तराइक जनताके हिन्दी भाषी होएबाक प्रचार कएल जा रहल छै । भारतीय अधिकारी ताहिके लेल भारतीय मिडियाकर्मी, नेपालक किछु संचार आ साहित्यसँ सम्वद्ध व्यक्ति आ राजनीतिक दलक नेतासभके प्रयोगमे लबैत रहल अछि । भारतीय अधिकारी एहि बातके कहियो समीक्षा करबाक कोशिस नइ कएलक जे भारतमे नेहरुक हिन्दी पट्टीक अवधारणा कोना सर्वस्वीकार भऽ गेलै आ नेपालमे किए ठीक ओएह फर्मूला डेट एक्सपाएर ओषधि भऽ कऽ रहि गेलै । कहबाक जरुरति नइ दुनू देशक समान चाम, भाषा, भोज्य समानता आ आर किछु समानताक आधारपर एक्के रंगक डाइग्नोसिस करबाक एकटा गम्भिर भूल छै । भारत आ भारतीय रणनीतिकार नेपालक मिथिला, भोजपूरा आ अवधक जनता आ भारतक इएह भाषा बजनिहार जनताक बीच भिन्नता कतऽ छै । ओहि तन्तुके नइ पकड़ि पाएल अछि । भारत जखन स्वतन्त्रताक आन्दोलन लड़ैत रहए, गान्धी आ नेहरुक नेतृत्वमे स्वाधिनताक आन्दोलनके एहि पट्टीक जनतामे हिन्दी आ खाधीके शस्त्रक रुपमे व्याख्यायीत कएल गेलै । स्वाधिनताक लेल एहि दुनूक स्वीकारोक्तिक विकल्प नइ छलै । खड़ी बोली भारतक ओहि क्षेत्रक जनताक बोली तँ नइ छलै मुदा एकटा सिन्थेटिक भाषा भेलाक कारण बहुत दुरुहो नइ बुझेलै । कार्यक्रम, उत्सव, आ औपचारिक क्षेत्रमे ई भाषा बाजऽ जाए लगलै । सरकार संरक्षण आ शिक्षाक माध्यमक कारणे रसे–रसे भारतक हिन्दी पट्टीमे ई भाषा विचरि रहल अछि । खास अवरोध नइ देखाइ दै छै । मुदा नेपालक तराइमे फर्मूला रणनीतिक असफलताक विश्लेषण कएल जाए तँ इएह बुझाइ छै भारतीय अधिकारी विगतमे सेहो ढंगसँ सूचना संकलन आ विश्लेषण नइ कऽ पाबिरहल अछि । नेपालक एहि पट्टीक जनताके राजनीतिक समाजशास्त्रिय आ उत्पादन सम्वन्धपर विचार कएने बिना कोनो धारण बनाएब अपनाके अन्हारमे रनखब अछि । जखन भारतमे साम्राज्यवाद विरुद्ध स्वाधिनताक लड़ाइ तलैत रहै तखन नेपालमे ओहि पट्टीक जनता अपने देशमे अनागरिक सन अवस्था भोगैत रहए । जखन भारतमे मन्दिर–मस्जिद विवादमे पुरा देश धार्मिक उन्मादक चरमपर पहुँचल रहए, मण्डल कमीशनक विवाद बड़े–बड़े नेताके राजनीतिकभविक्ष्यक रेखाचीत्र खींच रहल रहै ओहि समयमे नेपालक तराइक जनता भरि पेट भात खा कऽ निसभेर सूतल नइ रहए ओ जनयुद्धक सरंजाम कऽ रहल रहए । जेना बेटीक वियाहमे एक–एक चीज जोड़ैत अछि लोक, जेलेटिन, बम बनएबाक तरिका, कटुआ पेस्तोेल, कुक्कर बम, विद्युतीय धराप बनएबाक तरिका  किछु गोली–गट्ठा आ तकर प्रशिक्षण लेबऽमे वयस्त रहए । एहिठाम माक्र्स, लेनिन आ माओ विचारधारा चूल्हि, चौका, खेत–खरिहान सभतरि अपन पैठ बनौलकै । तें एहिठामक लड़ाइ आ लड़ाइक मनोविज्ञान भारतीय अपिधकारीक विश्लेषणसँ पृथक छै । भारत आ नेपालक सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितिमे गम्भिर मतभेद रहलै । एहि मतभेदक अन्तरवस्तुके नइ बुझबाक कारण भारतम चर्तुयता परिणामक स्तरपर निरशाजनक रहलै ।
हमरा जनिते एखनुक अवस्थापर गौर कएल जाए तँ कनेको भांगठ नइ रहि जाइ छै जे भारत भाषाक मामिलामे कि चाहैत अछि । ओ एखन कि सोचैत अछि आ अपना सोचके परिणाम धरि पहुँचएबाक लेल कोन बाट निर्धारण कएने अछि । हमरा विचारे सभ किछुु स्पष्ट छै । नेपालक राजनीतिक संक्रमणक कमजोर नसके पकड़ि कऽ भारत सांसदक माध्यमसँ हिन्दीक खम्भा गाड़ऽ चाहैत अछि । कमजोर सरकार, मधेशवादी दलक विकाउ चरित्र आ माओवादीक सत्तामे जएबाक धड़फड़ी संसदमे पहुँचल भाषा समवन्धी विधेयकके भारतीय स्वार्थ अनुसार परिवर्तित करा सकैए । लगै छै नेपालक भाषा सम्वन्धी विवादक भूकम्पक केन्द्रमे हिन्दीके रखल जा चूकल छै । साउथ व्लक नववर्षसंगे लाजिम्पाटमे जरुर किछु उत्कृष्ट मदिराक खेप पहुँचाओत ।
(ई लेख २०६७ सालमे तत्कालिन व्यवस्थापिका संसदमे भाषासम्बन्धि विधेयक बहसमे अएलाक सन्दर्भमे लिखल गेल छल ।) 

मैथिली आलेख सञ्चयन आ सतञ्जा विमोचित

प्रा. रामावतार यादव लिखित आलेख सभहक संग्रह मैथिली आलेख सञ्चयन आ दिगम्बर झा दिनमणिक सतञ्जा विमोचित भेल अछि । मैथिली विकास कोष धनुषा एहिके प्रकाशन कएलक अछि ।

मैथिलीक वर्तनी, रुपविज्ञान, ध्वनिविज्ञान, समाज भाषा विज्ञान, शब्दकोषशास्त्र, ऐतिहासिक भाषा विज्ञान, भाषा मृत्यु आदि विषयपर लिखल आलेख एहिमे संग्रहित अछि । विभिन्न पत्रपत्रिका, जर्नल आदिमे यादव लिखित मैथिलीक भाषा विज्ञानसँ सम्बन्धित लेखसभके एक्कहिटा किताबमे पाठकके सहजहि उपलब्ध भेल अछि ।
पुस्तकमे १६ टा आलेख संकलित अछि । मैथिली भाषा विज्ञान पुस्तककेँ समीक्षा, गोविन्द झाक मैथिली शब्दकोष पढ़ला सन्ताँ, साँय बहुमे गप्पसप्प कोना करीः महेन्द्र मलंगियाक नाटक सन्दर्भमे, मैथिली शब्दकोष ओ शब्दसङ्ग्रहः ऐतिहासिक सर्वेक्षण जेहन आलेखमे शब्दकोषसँ लऽ कऽ ग्राम्य जनजीविकाके बोलीधरिके भाषा वैज्ञानिक दृष्टिएँ शल्यकृया कएलगेल अछि ।
मैथिलीमे उपलब्ध शब्दकोष आ निर्माणक क्रममे रहितो पुरा नईं भऽ सकल शब्दकोषक सन्दर्भमे पुस्तकमे विस्तृत वर्णन कएल गेल अछि । मैथिलीक भूत, वर्तमान आ भविष्यक बारेमे भाषा वैज्ञानिक यादव किताबमे विभिन्न आलेखसँ मैथिलीक नव तस्वीर बनौने छथि । की मैथिली मरि जाएत ? भाषा मृत्युदऽ किछु विचार शीर्षकमे मैथिलीक भविष्यक चुनौती आ सम्भावना फरिछ होइत अछि । तहिना मैथिलीक मानक स्वरुप जे मैथिली भाषाक सम्बन्धमे सभसँ बड़का बहसके विषय अछि ताहि विषयमे यादव भाषा वैज्ञानिक दृष्टिएँ बाट देखौने छथि ।

2016-09-03

समय



राम एकवाल यादव

               
जे निर्वाध
पथपर लपइकरहलके
केओ रोकिकय पूछलक
कथिककेर हरबरी एना
कतौक भूकम्प या प्रलय
जे प्रतीक्षित छल
आगमन भेल अछि ।
               
हतास एवम् निराश होइत
दूनु नयन विस्फारित करैत
अन्वेषणात्मक दृष्टि घुमबइत
जोरस कल्लोल करइत
विक्षोभित आवाज मे बजलाह
के कहा छी !
चाक्षुष्य अवलोकन नहिभेल
अपन आतुरमे विध्न केनाभेल ।
               
अभय भऽ गर्जन करैत
अदृष्य सगौरव सम्झौलन
सठ्हम समयछी
हमरा नहिचिन्हलौं
हम ऊँछी, त्रिलोक छी
हमरा मे सव अन्तर्भूत अछि ।
               
व्यंग्य अओर हास्यमिश्रित
निरीक्षणात्मक लोचन घुमबइत
दग्घ भऽ ललकारइत सम्वोधन कयलन
अरे समयनिरवधि अन्तहीन
सत्ययुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग
सकल युगक प्रर्वतक
अप्रकट अलोकित अनन्तकाल
मानव भऽ प्रकट भऽ आउ
अपनेक गति मत्र्यलोकमे
द्विगुणित भऽ अहंकारक लोप होयत
पार्थिव अपार्थिवक परिमेय ज्ञात होयत ।
               
हुनकरकटुक्तिसहितक उक्तिवैचित्रय
समयके मोनपरल
आतुर भेल हुनकासहजबइत
आर्शीवचन कयलनहे मानव
अहाक आतुरता
चीरकालपर्यन्त रहौक
समयक यान्त्रिक गणनामे
खरिहानक मेहक बयल सदृश
भूभवचव्रmमे नृत्यवत् रहु ।